सोशल मीडिया पर हर कोई एक जैसी तस्वीरें, एक जैसे फॉर्मेट और एक जैसी भाषा में पोस्ट कर रहा है। द गार्डियन की यह रिपोर्ट बताती है कि आखिर इन दिनों सब कुछ इतना एक जैसा और 'कंफर्टेबल' क्यों दिखता है।
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक नया चलन दिख रहा है — 'कॉपी-पेस्ट की लंबी गर्मी'। एक पोस्ट, एक फोटो, एक स्टाइल... जो भी एक बार वायरल हो जाता है, वही अगले हफ्ते हर प्रोफाइल पर नजर आता है।
द गार्डियन की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, इन दिनों सब कुछ इतना एक जैसा दिखता है कि लोग अलग दिखने की कोशिश करने लगे हैं। वही रील्स, वही कैप्शन, वही म्यूजिक — हर तरफ एक ही तरह का कंटेंट।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम ऐसे कंटेंट को ज्यादा दिखाते हैं जो पहले से ट्रेंड में है। इससे क्रिएटर्स को एक जैसा कंटेंट बनाने का दबाव महसूस होता है, जिससे हर तरफ एक ही तरह की चीजें नजर आती हैं।
रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि क्या यह एक आरामदायक दौर है या रचनात्मकता के लिए खतरा? सोशल मीडिया पर चल रही इस बहस में कई क्रिएटर्स अलग हटकर सोचने की वकालत कर रहे हैं।
