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शहरी सहकारी बैंकों को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता पर देना होगा जोर: शाह

शहरी सहकारी बैंकों को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता पर देना होगा जोर: शाह

मुंबई। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने शनिवार को शहरी सहकारी बैंकों से प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए प्रौद्योगिकी अपनाने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और ग्राहक सेवाओं…

मुंबई। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने शनिवार को शहरी सहकारी बैंकों से प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए प्रौद्योगिकी अपनाने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और ग्राहक सेवाओं को आधुनिक बनाने का आग्रह किया। उन्होंने मुंबई में ‘नेशनल अर्बन कोआॅपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (एनयूसीएफडीसी) के नए कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि ग्राहकों की समृद्धि सुनिश्चित करने से बैंकों को वृद्धि हासिल करने में मदद मिलेगी। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने सभी शहरी सहकारी बैंकों से इस क्षेत्र के शीर्ष संगठन एनयूसीएफडीसी में एक साल के भीतर शामिल होने का भी आग्रह किया

एनयूसीएफडीसी भारत में शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए प्रमुख संगठन और स्व-नियामक निकाय के रूप में कार्य करता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा स्वीकृत और मुंबई में मुख्यालय वाला यह निकाय सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत करने के लिए पूंजी, आईटी बुनियादी ढांचा और तरलता सहायता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि सभी बैंक इस संगठन (एनयूसीएफडीसी) के सदस्य बनें, तकनीक लाएं, पारदर्शिता लाएं, कर्मचारियों को प्रशिक्षित करें, ग्राहकों को आधुनिक सेवाएं प्रदान करें और प्रतिस्पर्धा में बने रहें

शाह ने कहा कि देश के लगभग 1,400 शहरी सहकारी बैंकों में लगभग 690 पहले ही इस संगठन के सदस्य बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि बाकी यूसीबी को भी एक साल के भीतर इसका हिस्सा बन जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि भारत को समृद्ध बनाने के लिए इसके लोगों के बीच समृद्धि को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केवल पूंजी बाजार ही इस उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि हमें साथ-साथ स्वरोजगार की एक नई प्रणाली बनाने की जरूरत है। शहरी सहकारी बैंक ऐसा कर सकते हैं और यह हमारी जिम्मेदारी है। शाह ने कहा कि ”सहकार से समृद्धि” के विचार का अर्थ केवल बैंकों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि ग्राहक भी समृद्ध बनें, जिससे बदले में बैंकों को बढ़ने में मदद मिलेगी

आरबीआई की भूमिका के बारे में शाह ने कहा कि केंद्रीय बैंक और शहरी सहकारी बैंकों के बीच धारणा के अंतर को पाटने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शहरी सहकारी बैंकों के प्रति रिजर्व बैंक का नजरिया अलग है, और हमारे शहरी बैंक भी आरबीआई को अलग तरह से देखते हैं। हमें इससे बाहर निकलना होगा। सहकारिता मंत्री के रूप में अपने पांच साल के अनुभव का हवाला देते हुए शाह ने कहा कि जब भी सहकारिता क्षेत्र आत्मविश्वास के साथ संपर्क करता है, तो आरबीआई ने हमेशा सक्रिय सहायता प्रदान की है

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