350 मीटर सुरंग में मजदूरों ने दी मौत को मात ,जानिए कैसे काटे वो खौफनाक के 7 घंटे।

350 मीटर सुरंग में मजदूरों ने दी मौत को मात ,जानिए कैसे काटे वो खौफनाक के 7 घंटे।
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उत्‍तराखंड के चमोली में ग्‍लेशियर टूटने से भारी तबाही मची, बड़ी तेजी से यहाँ राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की पूरी टीम राहत कार्य में लगातार जुटी है इस बीच तपोवन के एक सुरंग में फंसे सभी मजदूरों को निकाला जा चुका है और दूसरी सुरंग में फंसे लोगों को निकालने की कोशिशें जारी हैं। तपोवन की सुरंग में लगभग 350 मीटर अंदर फंसे तीन लोगों थे जिन्हें बचाव दल ने निकाल लिया है।

बहादुर की बहादुरी उनकी जुबानी …..

बसंत बहादुर ने बताया कि हादसे वाले दिन रोज की तरह वह सुरंग में काम करने के लिए 8 बजे सुबह चले गए थे ,जब सैलाब आया था तो वह सुंरग में तकरीबन 300 मीटर अंदर थे ,बाहर से आ रही अस्पष्ट आवाजें उन्हें सुनाई दे रही थीं , उन्हें लग रहा था जैसे कोई उन्हें खतरे से आगाह करके सुरंग से बाहर निकलने को कह रहा हो. वह बताते हैं कि एक भंयकर ब्लास्ट की आवाज उनके कानों में आई थी. फिर पानी के रेले ने उन्हें पूरी तरह डूबो दिया. वे अपने साथियों के साथ हिम्मत करके पास में खड़ी जेसीबी मशीन पर चढ़ गए, यह इत्तफाक ही था कि सुरंग के भीतर उस वक्त उनका मोबाइल काम कर रहा था नेटवर्क इतना था कि बाहर बात हो रही थी ,बैटरी भी पर्याप्त थी , वह लगातार अधिकारियों के संपर्क में रहे और शुक्र है कि रेस्क्यू टीम हम तक पहुंच गई।

श्रीनिवास रेड्डी…….

एनटीपीसी में जियोलॉजिस्ट के पद पर कार्यरत हैं श्रीनिवास रेड्डी बताते हैं कि हादसे के वक्त वह टनल में करीब 350 मीटर अंजर रहे होंगे ,वह कहते हैं कि टनल में अचानक जब पानी और मलबा घुसा, तो वे सब सकते में आ गए , वहां फंसे हुए सब लोग एक-दूसरे को ढांढ़स बंधा रहे थे, एक उम्मीद दिला रहे थे , हिम्मत जुटा रहे थे ,वह कहते हैं कि 7 घंटे तक मलबे और पानी में डूबे रहने के कारण हमसब के पांव बुरी तरह से सूज गए थे ,लेकिन हम सभी कई घंटे एक रॉड का सहारा लेकर खड़े रहे,वहां हम ऑक्सीजन की कमी की वजह से घुटन महसूस कर रहे थे ,पर तभी सुरंग के ऊपरी हिस्से से मिट्‌टी गिरी और हवा आने लगी ,हम आराम से सांस लेने लगे ,उन्होंने बताया कि उनके बचने का असली कारण भी मोबाइल रहा।

सुरंग में जैसे ही लाइट कटी ,ऐसा लगा अब सब कुछ खतम।

वीरेंद्र कुमार गौतम को जब रेसक्यू टीम बाहर लेकर आई तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था ,बल्कि बाहर निकलते ही उन्होंने जिस तरह से अपनी खुशी जाहिर की उनका वीडियो वायरल हो गया , वह कहते हैं कि जैसे ही टनल में पानी घुसा वैसे ही लाइट में कट गई , पूरी सुरंग में भयानक अँधेरा छा गया लगातार बढ़ रहा था ,पहले घुटने तक आया तो उन्हें लगा कि कही बादल फट गया है देखते ही देखते पानी हमारे सीने तक पहुंच गया फिर हम लोगो को लगा कि बस अब हम लोगों का खेल खतम होने वाला है , फिर एक उम्मीद तब जगी जब सीने से पानी कम होने लगा ,हम सब ने थोड़ी हिम्मत बांधी।

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