विद्यार्थियों के जीवन में बसंत पंचमी का क्या है महत्व ?

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तू स्वर की देवी ,संगीत तुझसे ,हर शब्द तेरा है हर गीत तुझसे। हम हैं अकेले, हम हैं अधूरे,
तेरी शरण मे, हमें प्यार दे माँ हे शारदे माँ, हे शारदे माँ।
बसंत की देवी, मां सरस्‍वती को माना जाता है और उनके जन्मोत्सव के साथ ही बसंत ऋतू का स्वागत किया जाता है ,खेतो में पीली सरसो के फूल प्रकृति की गोद को पीली चादर से ढक देती है। विद्या की देवी माँ सरस्वती का प्रिय रंग पीताम्बर माना जाता है। इसलिए उनकी पूजा में पीतवर्णित वस्तुओ का विशेष ध्यान रखा जाता है। यह त्यौहार हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल माघ मास के शुक्ल पच्छ की पंचमी को देश भर में मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु हरिद्वार,प्रयागराज व अन्य पवित्र नदियों में स्नान करके माँ की पूजा अर्चना करते है , इतना ही नहीं घरो और स्कूलों में कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते हैं।

पीले रंग का है विशेष महत्व।

बसंत पंचमी के दिन संगीतकार, कलाकार, और विद्यार्थी माँ सरस्वती की आराधना करते है। मान्यता है कि मां सरस्‍वती की पूजा से घर में विशेष प्रकार की सकारात्‍मक ऊर्जा का संचार होता है। उत्तर भारत के कई भागो में बसंत पंचमी के दिन लोग पीले रंग के पकवान बनाते है और पीले वस्त्र भी पहनते है। श्रद्धालु माँ के प्रिय रंग के फूलों से उनका श्रृंगार करके , लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का कपडा बिछाकर माँ सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करते है। यह भी माना जाता है कि बसंत पंचमी के दिन ही सिख गुरु गोविन्द का जन्म हुआ था।

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