अपनी आलोचना को प्रशंसा में बदला ताजनगरी की इन खिलाड़ियों ने।

अपनी आलोचना को प्रशंसा में बदला ताजनगरी की इन खिलाड़ियों ने।
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उत्तर भारत का ताजनगरी ,खेल की दुनिया में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पंचम लहराने वाली बेटियों के नाम से मशहूर है।इनका सफर काफी संघर्ष भरा रहा,जमाने ने काफी ताने दिए लेकिन वे रुकी नहीं और जमाने के तानों का जवाब कामयाबी का शिखर छूकर दिया। आज जब कामयाबी को छू रही है तो वही लोग प्रशंसक हो गए जो पहले उनके खेलने पर ही एतराज उठाते थे। इन खिलाड़ियों का कहना है कि सफलता का मंत्र सिर्फ यही है कि ध्यान को बंटने मत दो। लोग क्या कहते हैं, यह मत सोचो, फोकस इस पर रखो कि तुम्हें क्या और कैसे करना है।

क्रिकेट टीम की इस खिलाड़ी की ज़ुबानी।

शुरुआती दौर में मुझे बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, हम लड़कियों के लिए अलग से न क्रिकेट कोच थे, न ही एकेडमी, इसलिए हमे लड़कों के साथ ही प्रैक्टिस करनी होती थी, लोगों की गलत सोच ने मेरी प्रैक्टिस बंद कर दी, आंखों से आंसू तक आ गए ,तब मेरी मां ने क्रिकेट के लिए मेरे जुनून को पहचाना फिर उन्होंने मेरी प्रैक्टिस के लिए मेरे भाई की ड्यूटी लगा दी जो तीन से चार घंटे की प्रैक्टिस के दौरान स्टेडियम में ही रहता था। इसके बाद जिला स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक मैं आगे बढ़ती गई। यह ज़ुबानी है इंडियन वुमेंस क्रिकेट टीम की सदस्य ईदगाह कॉलोनी निवासी पूनम यादव की।

मेडल जीतकर आलोचना को प्रशंसा में बदला।

इसी कड़ी में हम बात करेंगे अंतरराष्ट्रीय शूटर , सोनिया शर्मा की ,आज मैं जो कुछ हैं अपने पापा की वजह से हूँ एक लड़की के लिए शूटर बनना आसान नहीं था , मैंने कदम बढ़ाए तो पापा ने रास्ता दिखाया,लोग पापा से कहते कि निशानेबाजी लड़कियों का खेल ही नहीं है ,मैं हताश हो गई थी, सोचती थी कि क्या लड़की होना अपराध है, लेकिन पापा मुझे प्रोत्साहित करते रहे और फिर मैंने मेडल जीतकर लोगों की जुबान बंद कर दी अपनी आलोचना को प्रशंसा में बदल दिया।

खेल को करियर के रूप में चुनना नहीं था आसान।

बैडमिंटन में सात बार जिला चैंपियन रह चुकीं सदर निवासी राधा ठाकुर का जीवन भी काफी संघर्षो से भरा रहा ,मेरे लिए खेल को करियर के रूप में चुनना आसान नहीं था , एक तरफ माता पिता की बेबसी और लाचारी दूसरी तरफ लोगों के ताने , लोग कहते थे कि अगर करना ही है तो ऐसा काम करो जिससे परिवार की सहायता कर सको, इन सबके बीच मुझे बैडमिंटन को करियर बनाना था, मैंने जमाने की परवाह नहीं की , परिवार ने साथ दिया, जब मैं जिला बैडमिंटन चैंपियन बनी तो लोगों ने कहा कि बेटी तुमने खुद को साबित कर दिया।

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