हाथ पैर नहीं है लेकिन मैंने जीवन में कभी हारना नहीं सीखा,जीते कई अवार्ड।

हाथ पैर नहीं है लेकिन मैंने जीवन में कभी हारना नहीं सीखा,जीते कई अवार्ड।
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व्यक्ति के जीवन में कुछ दर्दनाक हादसे ऐसे हो जाते हैं जिसकी वजह से वे टूट जाते हैं या कभी कभी हादसे में शरीर के अंग का नुकसान होने से इंसान खुद को अपंग और लाचार समझने लगता है और उसकी जिंदगी वहीं रुक जाती है ,लेकिन कुछ ऐसे भी लोग होते है जो अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बना लेते है। इसका जीता जगता उदाहरण है फतेहपुर की सरिता द्विवेदी जिन्होंने चार साल की छोटी सी उम्र में 11 हजार वोल्ट का करंट लगने से दोनों हाथ और एक पैर गवां दिए। एक जगह पर कभी न ठहरने वाली उस चुलबुली सरिता की जिंदगी मानो थम सी गयी थी। उसने अपने दोनों हाँथ और एक पैर तो जरूर गवां दिए उसके अंदर कला का कीड़ा उसके जीवन को थमने नहीं दिया मात्र एक पैर ,और मुँह से अपनी जिंदगी के खाली पन्नों को रंगीन बना डाला।

बिना हाथ के सरिता चलाती हैं कंप्यूटर और मोबाइल।

सरिता के पिता विजयकांत द्विवेदी एक रिटायर्ड फौजी हैं।मौजूदा समय में एलिम्को में कार्यरत है। उस हादसे के बाद वह जीवन से निराश नहीं हुई। सरिता को बिना हाथ के कंप्यूटर और मोबाइल चलाते देखकर हर कोई हैरत में पड़ जाता है। सरिता ने प्रयागराज से दसवीं और इंटर किया पास किया। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से 2015 में फाइन आर्ट से स्नातक की पढ़ाई भी पूरी करने के बाद भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम में रिसेप्शनिस्ट व हाउस कीपिंग इंचार्ज की नौकरी मिल गई। सरिता ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि वह यह कभी नहीं सोचती कि वह किसी काम सकती। उन्हें जो करना होता है वो करके जरूर देखती हैं ,उन्होंने अपने जीवन में कभी हारना नहीं सीखा। सरिता की बहादुरी से उनके माता -पिता को बहुत गर्व है।

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