देश के इन जगहों पर अजीबोगरीब ढंग से मनाया जाता है होली का त्योहार।

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होली का त्यौहार आते ही लोगों में इसका उत्साह दिखने लगता है। नए और रंग बिरंगे कपड़े ,खुशबूदार गुलाल ,व मिठाइयां बाज़ारों में चारों तरफ नज़र आने लगते हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते इस बार होली का रंग काफी फीका नजर आने लगा है। सरकार ने होली का त्योहार मानाने को लेकर पाबंदी लगा दी है। एक साल पहले जहाँ लोग एक दूसरे को गले लगाकर त्योहार की शुभकामनाएं देते और खुशियाँ बांटते थे वहीं इस बार होली में शांत वातावरण देखने को मिलेगा। देश में कुछ जगह पर रंगो की होली खेली जाती है तो कहीं पर फूलों से। कई जगह ऐसी भी हैं जहां पर लोग एक दूसरे पर लट्ठ बरसाते हैं और आग के जलते अंगारों से होली खेली जाती है।

आइये जानते है किन जगहों पर मनाई जाती है ऐसी अजीबोगरीब होली।

मध्यप्रदेश : सबसे पहले हम बात करते हैं मध्प्रदेश में मालवा एक ऐसा बाजार है जहां भील आदिवासी के लोग रहते हैं। इस दिन को यहां जीवनसाथी से मिलने का दिन माना जाता है। आदिवासी लड़के एक ख़ास तरह का वाद्ययंत्र बजाते हुए डांस करते -करते अपनी मन पसंद लड़की पर गुलाल डालते हैं और लड़की को लड़का पसंद आते ही हाँ का जवाब गुलाल डालकर देती हैं।

कर्नाटक : यहां के कई इलाकों में होली के दिन आग जलाई जाती है इससे निकलने वाले अंगारे एक दूसरे पर फेंककर होली मनाते हैं। उनका मानना है की ऐसा करने से होलिका राक्षसी मर जाती है।
राजस्थान :यहां बांसवाड़ा में रहने वाली जनजातियां होली के दिन गुलाल के साथ होलिका दहन की राख मिलाकर होली खेलते हैं। इसके अलावा एक दूसरे पर पत्थर मारने का भी रिवाज़ है। मान्यता है कि इस होली को खेलने से जो खून निकलता है उससे व्यक्ति का आने वाला समय बेहतर होता है।

हरियाणा :यहां के कैथल जिले के दूसर पुर गांव में होली का त्योहार नहीं मनाया जाता है। दरअसल एक संत बाबा गांव के लोगों से नाराज हो गए थे ,जिसके चलते उन्होंने होलिका की आग में कूदकर अपनी जान दे दी थी। जलते हुए बाबा ने गांव को श्राप दिया था कि अब कभी यहां अगर होली मनाई गई तो अपशगुन होगा। इस डर से लोग यहां होली का त्योहार नहीं मनाया जाता है

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