एसिड अटैक ने रुकैय्या की आँखों की रोशनी छीन ली लेकिन हौसला नहीं।

एसिड अटैक ने रुकैय्या की आँखों की रोशनी छीन ली लेकिन हौसला नहीं।
khabar khalifa

जी हाँ हम बात कर रहे है महिलाओं के साथ हो रहे यौन हिंसा ,घरेलू हिंसा इसके अलावा तेज़ाबी हमला जो एक बर्बर अपराध है। इन अपराधों का भी शिकार लड़कियों को ही झेलना पड़ता है। जिस स्त्री से दुनिया का निर्माण हुआ है उसी स्त्री को उसके जीवन में इतनी प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। लक्ष्मी अग्रवाल एसिड अटैक , प्रीति राही अटैक केस, ये ऐसे भयानक कांड रहे जिसे पूरी दुनिया जानती है। इन दोनों केस के अपराधियों को मौत की सजा सुना दी गई है। इन मामलों के अलावा ऐसे कई मामले हैं जो कुछ छुपे है कुछ दुनिया के सामने हैं।

जानिए क्या हैं एक्ट ?

अपराध कानून संसोधन एक्ट 2013 में सेक्शन 357B और सेक्शन 357C को भी जोड़ा गया है, जिसके तहत एसिड अटैक की पीड़िता को राज्य सरकार की तरफ से मुआवजा और सेक्शन 326A के तहत मिलने वाली जुर्माना राशि देय होगी। इसी के साथ सरकार को पीड़िता को निशुल्क मेडिकल सुविधा भी उपलब्ध है। आपको बता दें कि एसिड बिक्री करने के कड़े नियम हैं। देश भर में वर्ष 2014 -2018 के बीच एसिड अटैक के 1,483 मामले सामने आए।

रुकैय्या ने ऐसे सीखा जीना।

इसी कड़ी में हम बात करेंगे एसिड का शिकार हुई रामबाग की रहने वाली रुकैय्या की,जिनका अपनी बहन अलीगढ जाना उनकी जिंदगी के लिए नासूर बन गया। बहन के देवर ने रुकैय्या पर शादी करने के लिए काफी दबाव बनाया। जब किसी भी तरह से बात नहीं बनी, तो उसने रुकैया पर तेजाब फेंक दिया और फरार हो गया। काफी दिनों तक इलाज चलने के बाद वह सदमे में रही। तेजाब ने उनके चेहरे को तो झुलसा दिया, लेकिन उनके हौसलों को नहीं डिगा सका।
हमलों के बाद घर में बंद हो जाने की बजाए इन्होंने समाज की आंखों में आंखें डालकर देखने का विकल्प चुना। रुकय्या का कहना है कि मैंने ठान लिया था कि एक बार फिर नए सिरे से जिंदगी शुरू करूंगी। आज मैं अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हूं। 

khabar khalifa

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *