प्रेरक है हौसले के दम पर उद्यमी बने रतन राजपाल की कहानी

प्रेरक है हौसले के दम पर उद्यमी बने रतन राजपाल की कहानी
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इस कहानी पर आसानी से कोई भी यकीन नहीं कर पाएगा कि कोई व्यक्ति केवल हौसले के दम पर इतनी लंबी छलांग लगा सकता है। यह प्रेरक कहानी है फैजाबाद (अब अयोध्या) जिले के रतन राजपाल की, जिन्होंने वास्तव में केवल अपने हौसले के दम पर दुकान पर काम करने वाले एक सहायक से सफल उद्यमी बनने तक की कारोबारी यात्रा तय की।


देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए एक शरणार्थी के परिवार में जन्म लेकर रतन राजपाल की संघर्ष यात्रा शुरू होती है। उनके पिता परमानंद राजपाल पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आकर फैजाबाद के रिकाबगंज में बस गए थे। पिता की शादी सीतापुर की ईश्वरी देवी से हुई। सन् 1955 में रतन राजपाल का जन्म हुआ। बचपन में पतंग उड़ाने का बहुत शौक था। अपने मोहल्ले में तो वह पतंगबाजी के बाजीगर कहे जाने लगे थे। दसवीं पास होने के बाद पढ़ाई छूट गई। पढ़ाई छूटी तो जैसे बचपन भी छूट गया। वह अपने ही एक मित्र परमजीत सिंह बल्ली की सराफ और आर्म्स की दुकान पर काम करने लगे। इसी दुकान पर काम करते हुए उन्होंने खुद को अपने पैरों पर खड़ा किया। छह दिसंबर 1977 को बनारस की रहने वाली सीमा देवी से विवाह के बाद उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ गई थीं। फिर सन् 1978 में बड़े बेटे सुशील राजपाल और सन् 1982 में छोटे बेटे धीरज राजपाल का जन्म होने के बाद उनका मन नई ऊंचाइयां छूने को कुलांचे भरने लगा। फिर जब बेटी सुजाता राजपाल का जन्म हुआ तो कारोबार में पैर जमाने का उनका संकल्प और दृढ़ हो गया।


रतन राजपाल ने सन् 1987 में सबसे पहले नमकीन बनाने की फैक्ट्री खोली और शिव नमकीन भंडार के नाम से अपना ब्रांड बनाया। हालांकि उनका यह कारोबार अच्छा नहीं चला और तीन साल बाद सन् 1990 में वह परिवार चलाने के लिए फिर से नौकरी करने लगे। यह नौकरी जब उनकी जरूरतें पूरी नहीं कर पाई तो सन् 1998 में उन्होंने फिर कारोबार में हाथ आजमाया और इस बार बेकरी का काम शुरू किया। उन्होंने कर्ज लेकर यह काम शुरू किया लेकिन कड़ा संघर्ष करके पैर जमाए रहे। उनकी कड़ी मेहनत देखकर दोनों बेटों ने भी कारोबार में हाथ बंटाना शुरू कर दिया।


आज बेकरी में उनका कारोबार एक मुकाम बना चुका है। उनकी फर्म शिवा बेकर्स फैजाबाद के झारखंडी रिकाबगंज से शुरू होकर अब फैजाबाद के औद्योगिक क्षेत्र मुमताजनगर में स्थापित हो चुकी है। आत्मबल के धनी रतन राजपाल अपने बेटों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर सामने आए। कुछ वर्षों पूर्व वह गंभीर रूप से बीमार पड़े थे। हालत इतनी बिगड़ गई थी कि उन्हें वेंटीलेटर पर रख दिया गया था। उस समय उन्हें देखने वाले बुरी तरह हताश हो जा रहे थे लेकिन वह मौत के मुंह से वापस लौट आए। अपने घर फैजाबाद वापस आने के बाद तो उन्होंने अपने आत्मबल के सहारे खुद को फिर से खड़ा कर लिया। अब वह फिर से नियमित रूप से अपनी फैक्ट्री पर जाते हैं और पूरे दिन वहां बैठकर कामकाज देखते हैं। हालांकि इससे पहले सुबह की अपनी दिनचर्चा से वह पूरी ऊर्जा हासिल कर लेते हैं। 

अर्चना ओझा

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