लखनऊ :छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले से देश के 22 जवान शहीद, देश में शोक और आक्रोश।

लखनऊ :छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले से देश के 22 जवान शहीद, देश में शोक और आक्रोश।
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सुकमा में हुए नक्सली हमले में देश के 22 जवान शहीद हो गए। जहां एक ओर इस घटना के बाद पूरे देश शोक का माहौल है वहीं दूसरी ओर लोगों में गुस्सा भी है। तमाम तैयारी और संसाधनों के बावजूद नक्सली एक बार फिर इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया। सूत्रों के मुताबिक़ सुरक्षा एजेंसियों को 5 दिन पहले ही नक्सलियों की तैयारियों के बारे में इनपुट मिल गया था, लेकिन कार्रवाई में देरी हो गई और देश के वीर शहीद हो गए।

सरकार को पहले से थी घटना की जानकारी।

छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में 22 जवानों की मौत के बाद सरकार की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों की भारी तादाद में मौजूदगी नक्सलियों ने इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया। देश को यह हैरान करने वाला है। आश्चर्य यह है कि 25 मार्च के आसपास से ही इस क्षेत्र में नक्सलियों का जमावड़ा हो रहा था और पांच दिन पहले ही सरकार को यह इनपुट मिल गया था कि नक्सली किसी बड़े वारदात की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन को-ऑर्डिनेशन की कमी के चलते उनसे मुकाबले में चूक हो गई।

नक्सली अपनी तैयारियों के देते बार बार रहे संकेत।

सुरक्षाबलों की तमाम तैयारियों के बावजूद नक्सली शहीद दिवस के मौके पर बड़ी घटना को अंजाम जरूर अंजाम देते हैं। इस साल भी नारायणपुर में जवानों से भरी बस को आईईडी से उड़ाकर उन्होंने अपनी तैयारियों के संकेत दे दिए थे। फिर दो दिन बाद 25 मार्च को तर्रेम कैंप के आसपास बड़ी संख्या में नक्सलियों के जमावड़े की खबर मिली थी। सुरक्षाबलों के दबाव से बौखलाए नक्सलियों ने अपनी रणनीति में थोड़ा बदलाव किया है। संयुक्त मिलिट्री कमांड का गठन कर इन दिनों टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव की रणनीति पर काम कर रहे हैं। नारायणपुर में आईईडी ब्लास्ट भी इसी का उदाहरण था, लेकिन सरकार इससे नहीं चेती।

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