लिथोप्लास्टी तकनीक हार्ट में पथरी को निकालने में करेगी मदद , जल्द ठीक होंगे मरीज़।

लिथोप्लास्टी तकनीक हार्ट में पथरी को निकालने में करेगी मदद , जल्द ठीक होंगे मरीज़।
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दुनिया का हर व्यक्ति किसी न किसी बीमारी का शिकार होता है। समय रहते यदि बीमारी का पता चल जाये तो हर बीमारी का इलाज संभव है। देश में ऐसी कई तकनीक उपलब्ध है जिनसे गंभीर से गंभीर बीमारी को ठीक करना आसान हो गया है। ठीक उसी तरह जिस तरह से राजधानी लखनऊ के रामसिंह (60) का एक तकनीकी माध्यम से इलाज़ किया गया। मर्रिज को आर्टरी में कैल्शियम से पथरी बन गई थी, इसे हटाने के लिए पहले सर्जरी करनी होती, फिर स्टेंट पड़ता। सर्जरी के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता। लेकिन यहां शुरू हुई लिथोप्लास्टी तकनीक ने रामसिंह राहत दे दी। इस तकनीक से हार्ट की आर्टरी में जमे कैल्शियम को तोड़कर स्टेंट लगा दिया गया। अब वह पूरी तरह ठीक हैं।

काम समय में होगा इलाज़।

रामसिंह की तरह ही तमाम हृदय रोगियों को इस नई तकनीक का फायदा मिलेगा। इस तकनीक के शुरू होने से सर्जरी की वेटिंग भी कम होने की उम्मीद है। यहां करीब दो साल से अधिक की वेटिंग चल रही है।कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. नवीन गर्ग का कहना है कि उम्रदराज मरीजों में यह समस्या ज्यादा मिलती है। करीब एक हजार गंभीर हृदय रोगियों में करीब 10 से 15 में स्टेंट से पहले कैल्शियम की वजह से जमा होने वाली पथरी हटाने की जरूरत पड़ती है। नई तकनीक से सर्जरी का दबाव कम होगा।

कैसे काम करती है यह तकनीक ?

पीजीआई के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. नवीन गर्ग ने बताया कि जिस तरह किडनी स्टोन को तोड़ा जाता है, उसी तरह हृदय की आर्टरी में बनी पथरी को भी एंजियोग्राफी कैथेटर के माध्यम से हटाया जाता है, इस तकनीक को लिथोप्लास्टी कहते हैं। आर्टरी के कैल्शियम को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया जाता है। जब ये बारीक हो जाते हैं तो स्टेंट लगा दिया जाता है। इसका फायदा यह होता है कि मरीज सर्जरी से बच जाता है। इस पर करीब ढाई लाख रुपये खर्च आता है।

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