तीवर गांव की संगीता बनी 80 महिलाओ की प्रेरणा, जैविक खेती शुरू कर पति के साथ मिलाया कदम से कदम।

तीवर गांव की संगीता बनी 80 महिलाओ की प्रेरणा, जैविक खेती शुरू कर पति के साथ मिलाया कदम से कदम।
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हर व्यक्ति के अंदर एक हुनर छिपा होता है, लेकिन उसको पहचानना इतना आसान नहीं होता ,कभी कभी इंसान अपनी कला को नहीं पहचान पाता और खुद की राह पकड़ने के बजाय दूसरा रास्ता पकड़ लेता है जिसके बाद उसे पछतावे और असफलता के अलावा कुछ हासिल नहीं होता। लेकिन अपने अंदर छुपे हुनर को कोई इंसान पहचान लेता है और मेहनत करने की क्षमता उसके अंदर होती है तो समाज में उसकी एक अलग पहचान होती है। कामयाबी उसके कदम चूमती है। उसे गरीबी का मुँह नहीं देखना पड़ता है। एक ऐसी ही कामयाबी की सीढ़ी चढ़ने वाली एक महिला के बारे में आज हम आपको बतायेगे जिसने अपने अंदर की उस कला को बाहर निकाला जो उसके जीवन की पहचान थी । एक महिला और उसके तीन बच्चे ,परिवार बड़ा था ,घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई इतका भार उठाना एक पति के लिए काफी मुश्किल था,क्योंकि पति एक छोटी सी नौकरी करता था। इनकम कम थी खर्च बड़े, इसलिए संगीता ने अपने पति का बोझ कम करने के लिए एक अहम कदम उठाया। जी हाँ हम बात कर रहे हैं गोरखपुर पाली ब्लॉक के तीवरान गांव की रहने वाली संगीता रावत की जिन्होंने पति के साथ कदम से कदम मिलकर चलने का फैसला किया और खेती करने का फैसला किया। बाजार की मांग और लोगों से मशविरे के बाद उन्होंने जैविक खेती को चुना और आख़िरकार संगीता की मेहनत रंग लाई और आज समाज में उनके इस काम की काफी सराहना भी हो रही है। अपने परिवार के अलावा दूसरे परिवार जीवन यापन अच्छे से हो सके इसलिए उसने कुछ समय पहले 12 महिलाओं से बुद्ध आजीविका स्वयं सहायता समूह का गठन किया था। संगीता की जैविक खेती से लोग काफी प्रभावित हुए और आज आलम यह है कि संगीता के साथ लगभग 80 महिलाएं समूह से जुड़कर रोजगार कर रही हैं। लोगो का विश्वास उनके प्रति इतना है कि गांव के लोग खेती के अलावा कुछ भी काम करने से पहले संगीता की सलाह लेते हैं।

पांच से आठ हज़ार की आमदनी करती हैं समूह की हर महिला।

जैविक की अच्छी उपज के लिए संगीता ने कृषि विभाग से प्रशिक्षण लिया और समूह के साथ मिलकर जैविक तरीके से सब्जी उगाना शुरू किया। समूह को इससे काफी लाभ हुआ ,एक अच्छी आमदनी होने के बाद संगीता ने एक नया रोजगार शुरू करने की योजना तैयार की और लग गई हल्दी व धान की खेती शुरू करने में। आपको बता दें कि यह समूह अब तक 16 पोषक वाटिका का निर्माण कर चूका है। मात्र सब्जी और हल्दी से पांच से आठ हज़ार रूपये समूह की प्रति महिला की आमदनी है। संगीता ने अपने खुद के तीन बीघा खेत में श्री विधि से धान बोया,अच्छी उपज और अच्छी आमदनी निकलकर सामने आई। समूह की अन्य महिलाएं भी प्रेरित होकर क़रीब 25 बीघे में धान की खेती की।

एनआरएलएम और पति ने बढ़ाया हौसला।

वर्तमान में इस गांव की छवि दूर दूर तक बनी हुई है आज गांव की हर महिला का अपना रोजगार है। किसी की अपनी परचून की दुकान है ,तो कुछ महिलाएं खेती कर रही हैं। समूह की सचिव कंचन और रुमाली देवी ने सब्जी बोने के साथ पशुपालन भी शुरू कर दिया है। अगर देखा जाए तो ये महिलाएं अपने पति के साथ कदम से कदम मिलकर चल रही हैं और घर का खर्च उठाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। समूह की अध्यक्ष संगीता का कहना है कि घर की जिम्मेदारी के साथ ही रोजगार की दिशा दिखाने में एनआरएलएम के स्थानीय अफसरों के साथ ही पति पंचम रावत ने सहयोग दिया है। जो हमारे समूह का हमेशा हौसला बढ़ाते रहे हैं।

क्या है एनआरएलएम ?

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्रामीण विकास मंत्रालय का उददेश्य ग्रामीण गरीब परिवारों को देश की मुख्यधारा से जोड़ना और विभिन्न कार्यक्रमों के जरिये उनकी गरीबी दूर करना है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने जून, 2011 में एनआरएलएम की शुरूआत की थी।

क्या है श्री विधि ?

श्री विधि (एस.आर.आई) भी धान की खेती करने की एक पद्धति है, इस पद्धति को 1983 में अफ्रिका के मेडागास्कर में खोजा गया था। श्री विधि हमारे परम्परागत विधि बोवाई और रोपाई विधि से अलग है. इस लेख में श्री विधि से धान की खेती करने का तरीका और इसकी पूरी प्रक्रिया, देखभाल एवं पैदावार का उल्लेख किया गया है।

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