लाल किला का इतिहास 15 अगस्त1947 से लेकर 26 जनवरी 2021 तक।

लाल किला का इतिहास 15 अगस्त1947 से लेकर 26 जनवरी  2021 तक।
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एक ऐसा किला जो 400 वर्षो से खड़ा है इस किले ने भारत की गुलामी और आज़ादी दोनों को देखा है,जिसने कई आक्रमणकरियो को झेला ,फिर भी इसका अपना स्वाभिमान आज भी बरक़रार है आज भी हम अपनी आजादी का जश्न इसी किले के छाँव में मनाते है आज हम उसी किले के इतिहास से आपको अवगत करायेगे हम बात कर रहे है दिल्ली के लाल किला के बारे में जो दिल्ली ही नहीं पुरे भारत की शान ‘लाल किला’ अपनी शान-शोहरत के लिए पूरी दुनिया में प्रख्यात है दिल्ली की सलतनत पर 200 सालों से ज्यादा राज्य करने वाले मुग़ल साम्राज्य ने लाल किला से अपनी पूरी सल्तनत को संभाला, यह किला दिल्ली के बीचों बीच स्थित है, जो दिल्ली का मुख्य दर्शनीय स्थल है, यहाँ हजारों की संख्या में हर साल लोग आते है। जिसका डिजाइन उस समय के उस्ताद अहमद लाहौरी ने किया थाले का निर्माण यमुना नदी के तट पर किया गया था, किले का निर्माण कार्य मुसलमानों के पावन दिन मुहरम पर 13 मई 1638 को शुरू किया गया था।

जानिए किले पर कब और किसका किसका शासन रहा ,कौन पराजित हुआ ?

1803 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से मराठियों की लड़ाई हुई, जिसमें मराठी हार गए, जिसके बाद ब्रिटिश लोगों ने मुगलों की इस एतेहासिक जगह को अपना घर बना लिया। मुग़ल बहादुर शाह 2 ने 1857 की लड़ाई में ब्रिटिश को हराया था, लेकिन वे ज्यादा दिन तक यहाँ राज्य नहीं कर पाए और एक बार फिर ब्रिटिशों का महल पर कब्ज़ा हो गया। आजादी के लिए संघर्ष कर रहे, भारत के स्वतंत्रता सेनानियों को कई बार लाल किले में बनाई गई जेल में रखा गया ,15 अगस्त 1947 को जब अंग्रेज भारत छोड़कर गए, तब पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल जी ने लाल किले के लाहौर दरवाजे पर अपने देश की शान तिरंगे झंडे को फ़हराया। साल 1752 में मुगल पूरी तरह से टूट चुके थे, और एक संधि की गई जिसके तहत दिल्ली की राजगद्दी संभालने की जिम्मेदारी अब मराठों की थी. 1760 में मराठों ने लाल किले के दीवान-ए-खास की चांदी की परतें निकलकर पिघला दीं और इसे बेचकर पैसे इकट्ठे कर अहमद शाह दुर्रानी की सेना से युद्ध किया।दुनिया का सबसे नायाब माना जाने वाला कोहिनूर हीरा लाल किले में स्थित शाहजहां के राज सिंहासन का हिस्सा था। आपको बता दे कि इन प्राचीन युद्धों के बाद अब 26 जनवरी 2021 में हुए किसानो का उग्रवादी किस्सा जिसकी वजह से देश की आबरू पर दाग लगा ,इतिहास के पन्नों में होगा, जो वर्तमान के लिए तो निंदनीय है ही और आने वाली हर पीढ़ी के लिए भी बेहद शर्मनाक होगा।

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