Citizenship Ammendment Bill, 2019 लोकसभा में हुआ पास

Citizenship Ammendment Bill, 2019 लोकसभा में हुआ पास
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दिल्ली: पिछले एक हफ्ते से लगातार विवाद का विषय रहा नागरिकता संसोधन विधेयक, 2019(Citizenship Ammendment Bill, 2019) मंगलवार को रात 12: 05 मिनट पर लम्बी बहस के बाद लोकसभा में पास हो गया। इस विधेयक को संसद में पेश करने के लिए वोटिंग करनी पड़ी जिसमें 82 वोट विपक्ष में पड़े वहीं 293 वोट पक्ष में पड़े। लगभग डेढ़ घंटे के विरोध और बहस के बाद ये विधेयक लोक सभा में पास हो गया। आपको बता दें की विपक्षी दल इस विधेयक का लगातार विरोध कर रहे हैं साथ ही साथ सरकार पर धर्म के नाम पर भेदभाव करने का और संविधान का उलंघन करने का आरोप लगा रहे हैं।

Source: https://www.jagranjosh.com/general-knowledge/citizenship-amendment-bill-2019-in-hindi-1575898225-2

इस देश का विभाजन धर्म के आधार पर कांग्रेस पार्टी ने किया है – अमित शाह

Amit Shah on Citizenship Ammendment bill 2019
Amit Shah on Citizenship Ammendment bill 2019

नागरिकता संसोधन विधेयक, 2019(Citizenship Ammendment Bill, 2019) को पेश कर रहे गृह मंत्री अमित शाह ने दलील देते हुए कहां कि,’ संविधान का आर्टिकल 14 तर्कसंगत वर्गीकरण के आधार पर कानून बनाने ने नहीं रोक सकता है उन्होंने आगे कहा कि जब 1971 में इंदिरा गांधी सरकार में बांग्लादेश से आये शरणर्थियों को नागरिकता दी गयी लेकिन पाकिस्तान से आये हुए लोगों को क्यों नागरिकता नहीं प्रदान की गयी, यहां तक की राजीव गाँधी के वक़्त में भी नागरिकता प्रदान की गयी। ‘ उन्होंने विपक्ष के समानता के अधिकार वाला मुद्दा उठाने पर कटाक्ष करते हुए कहा कि फिर अल्पसंखयकों को विशेष अधिकार क्यों ?
अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा की इस देश का विभाजन धर्म के आधार पर कांग्रेस पार्टी ने किया है इसीलिए आज नागरिकता संसोधन विधेयक की जरुरत पड़ी है।

जाने नागरिकता संसोधन विधेयक, 2019(Citizenship Ammendment Bill, 2019) से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 Citizenship Ammendment bill 2019 passed in loksabha
Citizenship Ammendment bill 2019 passed in loksabha

ये नागरिकता संसोधन विधेयक, 2019(Citizenship Ammendment Bill, 2019) पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान में धर्म के आधार पर प्रताड़ित किये गए गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक- हिन्दू, जैन, सिख, ईसाई, बौद्ध और पारसीयों को भारत की नागरिकता देने से जुड़ा हुआ है। इस बिल में नागरिकता कानून 1955 में बदलाव किया जा रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक अगर अल्पसंख्यक एक साल से लेकर छह साल तक भारत में शरणार्थी बनकर रहे हैं तो उन्हें देश की नागरिकता दे दी जाएगी इससे पहले ये अवधि 11 साल थी। इस विधेयक में नागरिकता मिलने की बेस लाइन 31 दिसंबर 2014 रखी गयी है इसका मतलब है की इस अवधि के बाद इन तीन देशों से आने वाले अल्पसंख्यकों को 6 साल तक भारत में रहने के बाद नागरिकता मिल जाएगी। इनके अलावा बिल में नार्थ ईस्ट राज्यों के लिए छूट का अलग से प्रावधान किया गया है।

विपक्ष लगातार कर रहा है विधेयक का विरोध

Opposition's protest against Citizenship Ammendment bill 2019
Opposition’s protest against Citizenship Ammendment bill 2019

विपक्ष लगातार इस बिल का विरोध कर रहा है, इस बिल के विरोध में लगभग सभी विपक्षी दल लामबंध हो गए है। विपक्ष सरकार पर संविधान की मूल भावना और उसके अनुछेद 14, आर्टिकल 5, 10, 15, 25 व 26 का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहा है। विपक्षी नेता अधीर रंजन चौधरी ने सरकार पर आरोप लगते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक मुसलमानों के खिलाफ है और इसमें लोगों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव किया जा रह है। वहीं कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने गृह मंत्री अमित शाह के कांग्रेस पर धर्म के आधार पर विभाजन के आरोप का जवाब देते हुए कहां कि दो राष्ट्र सिद्धांत की नींव 1935 में अहमदाबाद में विनायक सावरकर ने हिन्दू महासभा के सत्र में रखी थी, न की कांग्रेस पार्टी ने।

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