BJP ने जारी की 20 जिलों के 819 उम्मीदवारों की सूची,सभी जातियों का सामांजस बनाकर लड़ेगी चुनाव।

BJP ने जारी की 20 जिलों के 819 उम्मीदवारों की सूची,सभी जातियों का सामांजस बनाकर लड़ेगी चुनाव।
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उत्तर प्रदेश के त्री स्तरीय पंचायत चुनाव के ऐलान के बाद 75 जिलों में प्रतिदिन चुनाव की लहर बढ़ती देखी जा रही है। अब इस चुनाव की आगे की प्रक्रिया भी कर दी गई है। जी हाँ बीजेपी ने 20 जिलों के 819 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इस बार इस सूची में एक अहम बात सामने आई है। पिछड़े और मुस्लिम समाज को प्राथमिकता दी गई है। पार्टी के द्वारा वोटों का गणित साधने के लिए पिछड़ो को प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा,‘सबका साथ, सबका विश्वास’ फॉर्मूले पर मुस्लिम समुदायों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में शामिल किया गया है। मुस्लिम को प्रत्याशी के रूप में चुनना पार्टी का एक धरणा को तोडना है क्योंकि ऐसा माना जाता था कि मुस्लिमों को टिकट नहीं दिया जाता है। बीजेपी ने अनारक्षित सीट पर भी पिछड़ो को टिकट देकर खुद को उनका हितैषी बताने का प्रयास किया है।

पूर्व जिलाध्यक्षों को टिकट लेकिन पदाधिकारियों को नहीं आखिर क्यों ?

बरेली की पूर्व विधायक सुभाष पटेल की पत्नी रश्मि पटेल, बरेली के फतेहगंज से मंत्री रहे भानुप्रताप सिंह की बेटी तेजश्वरी सिंह ,आगरा के पूर्व सांसद बाबूराम की पुत्रवधू सीमा चौधरी को उम्मीदवार के रूप में खड़ा किया गया है। जिस वार्ड में जिस जाति के लोग ज्यादा है वहां उसे प्राथमिकता मिली है। पार्टी द्वारा जारी पहली सूची में छोटे कार्यकातार्ओं इतना ही नहीं विधायकों-सांसदो के रिश्तेदारों को चुनाव लड़ाने की जगह कार्यकर्तार्ओं को महत्त्व दिया गया है। कई जिलों में जिलाध्यक्षों के भी नाम दिया गए हैं। हालांकि किसी पदाधिकारी को पार्टी ने इस बार टिकट नहीं दिया है। क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव ने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर कोई पदाधिकारी चुनाव लड़ेगा तो उसे अपने पद से पहले त्याग पत्र देना होगा।

चुनाव में आएंगे अच्छे लोग तो ग्रामीण क्षेत्रों का होगा अच्छा विकास।

भाजपा के प्रदेश महामंत्री अश्विनी त्यागी ने मुस्लिमों को टिकट देने पर कहा कि ‘भाजपा कभी जाति धर्म देखकर टिकट नहीं देती है। प्रधानमंत्री के दिए गए मंत्र सबका साथ सबका विश्वास के फार्मूर्ले पर फिट बैठाकर उसे पार्टी ने टिकट दिया है। उन्होंने कहा कि ‘पंचायत चुनाव में भाजपा ने दीनदयाल उपाध्याय के सपने अन्त्योदय को साकार करने का प्रयास किया है। पंचायत चुनाव में अच्छे लोग आएंगे तो ग्रामीण क्षेत्रों का अच्छा विकास होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने इस बार कई वरिष्ठों और अनुभव वाले नेताओं को मैदान में उतारा है।

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