चुनाव का बिगुल बजते ही बंगाल ने लिया हिंसा का रूप।

चुनाव का बिगुल बजते ही बंगाल ने लिया हिंसा का रूप।
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चुनाव आयोग ने 26 फरवरी को पश्चिम बंगाल में चुनाव की घोषणा कर दी है और यहाँ पर आठ फेज में चुनाव कराया जायेगा। 27 मार्च को पहले चरण की वोटिंग शुरू की जाएगी। वहीं एक अप्रैल को दूसरे,6 अप्रैल को तीसरे ,10 अप्रैल को चौथे,17 अप्रैल को पांचवे फेज, 22 अप्रैल को छठे, 26 अप्रैल को सातवें और 29 अप्रैल को आखिरी यानी आठवें फेज का मतदान होगा। चुनाव आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल में एक लाख से ज्यादा मतदान केंद्रों पर वोट डाले जाएंगे। कोरोना को देखते हुए सभी राज्यों में मतदान केंद्र बढ़ाए गए हैं। इसके अलावा मतदान का समय भी एक घंटा बढ़ाया गया है,इतना ही नहीं सभी चुनाव से पहले चुनाव अधिकारियों का टीकाकरण कराया जायेगा। बंगाल में शांति पूर्ण चुनाव संपन्न करने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की 125 कंपनियों की तैनाती की जाएगी। जिसमें इसमें सीआरपीएफ की 60 कंपनी, बीएसएफ की 25 कंपनी, एसएसबी की 30 कंपनी, सीआईएसएफ की 5 कंपनी और आईटीबीपी की 5 कंपनियां शामिल हैं।

बंगाल में घमासान सियासत।

चुनाव तारीख का ऐलान, छिड़ गया घमासान जी हाँ बंगाल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बजते ही राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है और हिंसा की खबरें आनी शुरू हो गई हैं। मिली जानकारी के अनुसार, कोलकाता के कादापारा में बीजेपी दफ्तर में बने गोदाम में घुसकर मोबाइल प्रचार वैनों में तोड़फोड़ की जिसमें कई प्रचार वैनों को नुकसान पहुंचाया गया है। यहां पर खड़ी गाड़ियों के शीशे भी तोड़े गए और लूट को भी अंजाम दिया गया है। बीजेपी ने तोड़फोड़ और हमले का आरोप तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर लगाया है। 8 चरणों में चुनाव कराने के फैसले का बीजेपी और कांग्रेस ने स्वागत किया है लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने बीजेपी के हिसाब से चुनाव की तारीखों का ऐलान किया है। आरोप लगाते हुए आगे उन्होंने कहा केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु में एक चरण में चुनाव हो रहे हैं तो बंगाल में 23 दिन का फुटबॉल टूर्नामेंट क्यों ?

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