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September 22, 2019
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‘दे दे प्यार दे’ को नहीं मिल पायेगा जनता का प्यार, पढ़े पूरी समीक्षा

de de pyaar de poster

एक 26 वर्षीय आकर्षक लड़की स्ट्रिपर होने का नाटक करके एक बैचलर पार्टी में घुस जाती है। लेकिन इससे पहले कि वह दूल्हे पर अपना हाथ रखती है, वे दुल्हन और उसके दोस्तों द्वारा पकड़ी जाती है। शुरुआत में सब सँभालने के बाद उसे उसी पार्टी में नशा चढ़ जाता है और सुबह वह अपने आप को दूल्हे के 50 वर्षीय दोस्त के कमरे में पाती है|

इस तरह आयशा (राकुल प्रीत) और आशीष (अजय देवगन) पहली बार मिलते हैं। अगर आपको लगता है कि यह विचित्र और पचाने में थोड़ा कठिन नहीं था, तो निर्देशक अकीव अली उसी लड़के की शादी में आयशा और आशीष के डांस सीक्वेंस को दिखाते हैं जिसकी पार्टी में आयशा बिना किसी न्योते के घुस आती है| हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब फिल्म में सिर्फ पांच मिनट में होता है।

अकीव अली का निर्देशन लंदन के 50 वर्षीय निवेश ब्रोकर के इर्द-गिर्द घूमता है, जो 26 वर्षीय इंजीनियर के प्यार में पड़ जाता है, जो पार्ट-टाइम बारटेंडर का काम करती है| हालांकि उम्र का अंतर उन्हें थोड़ी देर तक एक दूसरे से दूर रखता है लेकिन  दोनों जल्द ही एक दूसरे की ओर आकर्षित हो जाते हैं।

De-De-Pyaar-De-

कुछ रोमांटिक सीन्स और उनके बीच के केमिस्ट्री जमने के बाद आशीष आयशा को अपनी पहली पत्नी मंजू और अपने दो बच्चों से मिलवाने का फैसला करता है| आशीष के बच्चे आयशा के हम-उम्र हैं इसलिए आशीष को अपनी अजीबो-गरीब परिवार को शादी के लिए मनाने के लिए एड़ी-छोटी का जोर लगन पड़ता है|

एक रोम-कॉम के रूप में देखा जाये तो, दे दे प्यार डे एक बहुत ही बेकार नोट पर शुरू होती है। पहला हाफ देखा जाये तो उसमें भर-भरकर फ़्लर्ट और रोमांस लाने की कोशिश की गयी है जिसमें कॉमेडी का तड़का लगाने की कोशिश की गयी है|

दे दे प्यार दे की पटकथा उतनी ही भ्रामक है जितनी कहानी। आधुनिक युग की प्रेम कहानी और सदियों पुराने नैतिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाने के लिए अली बुरी तरह विफल रहे।

पहली हाफ के बाद, फिल्म तबू और जिमी शेरगिल पर घुमते हुए दिखाई गयी है। अभिनय की बात की जाये तो अजय देवगन, जो कॉमेडी शैली में नए नहीं हैं, 50 साल का आदमी जो आधी उम्र की लड़की से प्यार करता है के रूप में बिलकुल फिट बैठते हैं।

दूसरी ओर, राकुल प्रीत अपने किरदार में किसी भी तरह की गहराई लाने में विफल रहती हैं। दिलचस्प बात यह है कि, अजय और राकुल ने दे दे प्यार दे में अधिकतम स्क्रीन स्पेस लिया है, लेकिन यह तब्बू है जो इस रोम-कॉम की वास्तविक नायक और नायिका हैं। वह अपनी उपस्थिति के साथ हर फ्रेम को रोशन करती है, और उनकी कॉमिक टाइमिंग बिलकुल बेहतरीन है। तब्बू के प्रशंसक के रूप में जिमी शेरगिल ने इस सुस्त कहानी को थोड़ी राहत दी। उनकी भूमिका महज एक कैमियो होने के बावजूद यादगार रहेगी।

De de Pyaar de

कुल मिलाकर दे दे प्यार दे एक रोम-कॉम फिल्म के रूप में दर्शकों को कम पसंद आने के राडार में हो सकती है| इस फिल्म को एक अच मोड़ देने में इसके निर्देशेक बुरी तरह से असफल होते हुए दिखाई दे रहे हैं| लेकिन तब्बू के डाई-हार्ड फैन को यह फिल्म बहुत पसंद आएगी।

 

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