विश्व कैंसर दिवस : क्या कैंसर वाकई में जीवन का अंत है ,या उसको मात दिया जा सकता है |

विश्व कैंसर दिवस : क्या कैंसर वाकई में जीवन का अंत है ,या उसको मात दिया जा  सकता है |
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दुनियाभर में कई घातक बीमारिया है जिसमे से एक कैंसर है | तमाम वैज्ञानिक उपलब्धियों के बावजूद आज भी हर मिनट 17 लोगों की जान ले रहा है। इस बीमारी के इलाज में जितनी गंभीरता की जरूरत है उतनी जरूरी इसके बारे में जागरूकता होना भी है।
यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल (यूआईसीसी) पिछले 88 वर्षों से दुनिया के 70 देशों में कैंसर से बचाव के लिए अभियान चला रहा है। इस बार की थीम ‘आए एम एंड आई विल’ है। देश से दुनिया भर के लोगों को संदेश दिया जा रहा है कि आप कोई भी हैं, आपका एक फैसला बेहद अहम है। दुनिया के हर व्यक्ति को कैंसर मुक्त दुनिया के लिए प्रण लेना होगा।

विश्व कैंसर दिवस : क्या कैंसर वाकई में जीवन का अंत है ,या उसको मात दिया जा  सकता है |

देशभर में कैंसर के पुरे मामले |

यूआईसीसी की संस्था इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) द्वारा 17 दिसंबर को जारी ‘ग्लोबोकैन 2020’ की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 में दुनिया भर में कैंसर के करीब 1.93 करोड़ मामले सामने आए हैं जबकि एक करोड़ की मौत हो चुकी है। पांच में से एक व्यक्ति को पूरे जीवन काल में कैंसर होने का अनुमान है। 8 पुरुषों में से एक जबकि 11 महिलाओं में से एक महिला की मौत कैंसर से होती है। इसके अनुसार दुनिया भर में कैंसर की पुष्टि होने के बाद 5 साल तक करीब 5 करोड़ मरीज रहते हैं।

विश्व कैंसर दिवस : क्या कैंसर वाकई में जीवन का अंत है ,या उसको मात दिया जा  सकता है |

कैंसर जीवन का अंत है?

कैंसर को मात देने वाली शिवानी (23) वर्षीय बताती हैं कि 2018 19 जीभ में होने वाली स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा कैंसर की पुष्टि हुई। एक पल को लगा कि पूरी दुनिया का ही खत्म हो गई पर मैंने हिम्मत नहीं हारी। बिना देर किए डॉक्टर से सलाह ली और ऑपरेशन में आधी जीभ काटनी पड़ी। डॉक्टरों ने हाथ की त्वचा से नई जीभ तैयार की। इसके बाद 50 दिनोंं तक रेडिएशन और कीमोथेरेपी की छह साइकिल से होकर गुजरी।

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