महाराष्ट्र की सियासी उठा-पटक पहुंची कोर्ट

महाराष्ट्र की सियासी उठा-पटक पहुंची कोर्ट
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महाराष्ट्र की राजनीतिक लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई है. वहां पर कांग्रेस, एनसीपी व शिवसेना की ओर से दायर की गई संयुक्त अर्जी पर छुट्‌टी के दिन विशेष सुनवाई हुई. इस मसले पर कांग्रेस के वकीलों ने राज्यपाल व केंद्र सरकार को घेरा. उन्होंने इसे संविधान का उल्लंघन करार दिया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में कोर्ट ने सोमवार सुबह तक के लिए मामला टाल दिया

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लगेगा विपक्ष को झटका

महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच रविवार को सुप्रीम कोर्ट विपक्षी दलों की याचिका पर सुनवाई हुई। शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस ने देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार को शपथ दिलाने के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के फैसले को चुनौती दी है। एनसीपी की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि अजित पवार का विधायक दल के नेता का दावा गलत है। 54 में से 41 विधायकों ने अजीत पवार को विधायक दल का नेता नहीं माना है। इस संबंध में राज्यपाल को भी जानकारी देने की बात कही है। इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राज्यपाल की ओर से सरकार बनाने से संबंधित सभी पत्र को सुप्रीम कोर्ट में रखने का आदेश दिया। केंद्र सरकार को राज्यपाल से सभी कागजात मंगाने का आदेश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार की सुबह 10.30 बजे तक मामला टाला

याचिका में विपक्ष ने राज्यपाल के फैसले को मनमाना और दुर्भावनापूर्ण बताया। तीनों पार्टियों ने मांग की है कि विधायकों की खरीद-फरोख्त रोकने के लिए सरकार गठन के 24 घंटे में फ्लोर टेस्ट हो जाए। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है। तीनों दलों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर रहे कपिल सिब्बल ने दलीलें शुरू करते हुए कहा कि रविवार को आप लोगों को तकलीफ दी, इसके लिए माफी मांगते हैं। विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 145 का है। चुनाव पूर्व गठबंधन को पहले मौका मिलता है। लेकिन चुनाव पूर्व गठबंधन टूट गया। अब हम चुनाव बाद बने गठबंधन पर निर्भर हैं। भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की ओर से मुकुल रोहतगी कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों का कोई मौलिक अधिकार नहीं होता। शिवसेना, कांग्रेस व एनसीपी को केस में पार्टी बनाया गया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट में बहस हुई। इस सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बेंच बन गई है और सुनवाई हो रही है। अब इस सवाल को उठाने का कोई मतलब नहीं है।

देवेंद्र फडणवीस को भी जारी किया गया है सुप्रीम कोर्ट से नोटिस

कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्यपाल बहुमत के आंकड़े को लेकर किस प्रकार आश्वस्त हुए? उन्होंने सवाल किया कि किस प्रकार बहुमत का आंकड़ा हासिल किया गया। सुबह पांच बजे राष्ट्रपति शासन हटाया गया। राज्यपाल की मंशा पर सवाल उठाते हुए अभिषेक मनु सिंधवी ने कहा कि केंद्र के निर्देश पर उन्होंने काम किया। बहुमत है तो आज ही साबित करें। कपिल सिब्बल ने कहा कि रात को कांग्रेस, शिवसेना व एनसीपी ने मिलकर सरकार बनाने का फैसला लिया और सुबह को भाजपा की सरकार कैसे बना दी गई? यह राज्यपाल की नीयत को संदेह के घेरे में लाता है। इस मामले में सिब्बल ने कर्नाटक, गोवा व उत्तराखंड का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने अभी तक फ्लोर टेस्ट का कोई समय नहीं दिया है। कांग्रेस, शिवसेना व एनसीपी के वकीलों ने कहा कि दावा करने पहुंचे विधायकों के सामने तुरंत शपथ क्यों दिलाई गई। उन्होंने जल्द फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की गई। इस पूरी प्रक्रिया का लाइव टेलीकास्ट कराने की मांग की गई है।

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