किसान संगठनों की नयी रणनीति ,ट्रैक्टर परेड के बाद गांव गांव जाके सरकार की खोलेंगे पोल |

किसान संगठनों  की नयी रणनीति ,ट्रैक्टर परेड के बाद गांव गांव जाके सरकार की खोलेंगे पोल |
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किसान संगठनों ने पहले राज्यवार फिर राष्ट्रीय स्तर की बैठक करके अपनी संसद में आगे की रणनीति तय कर ली है।
किसान बिना अपनी मांगे पूरी किये अब ये अंदोलन खत्म नहीं करने वाले है |किसान संगठनों का कहना है कि वह न तो सड़क पर बैठने आए हैं और न ही इन दोनों मांगों से समझौता करके खाली हाथ अपने खेत खलिहानों की तरफ लौटेंगे। किसान दो मुद्दों पर एकजुट हैं। उन्हें केन्द्र सरकार से एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित करने और तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की गारंटी चाहिए।

शानदार परेड के जरिये ,दिखाएंगे भारत को कृषि प्रधान देश |

महिलाओं, बच्चों और कलाकारों के साथ किसानों ने अपनी परेड को भव्य बनाने की रणनीति बनाई है। कार्यक्रम को रंगारंग रखने के अलावा ट्रैक्टरों पर देश के झंडे के साथ किसान का झंडा भी लहराएगा। आंदोलन के लिए पहुंचे हर राज्य के ट्रैक्टर या किसानों की परेड लोगों के आकर्षण का हिस्सा रहेगी।किसानों की एक जिद और भी है। वह दिल्ली की आउटर रिंग रोड पर ट्रैक्टर परेड निकालेंगे। इसके लिए एक लाख के करीब ट्रैक्टरों को दिल्ली की सीमा तक लाने की तैयारी तेजी से चल रही है। इसके लिए को-आर्डिनेशन कमेटी, वॉलंटियर्स का चयन, परेड में शामिल किसानों, महिलाओं, युवाओं, बच्चों के लिए जरूरी सुख-सुविधा का इंतजाम समेत तमाम बिंदुओं को केन्द्र में रखकर किसान संगठन रोडमैप को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। 500 से अधिक किसान संगठनों ने इसके लिए पूर्ण समर्थन किया है और सैकड़ों किसान प्रतिनिधि सहमति जता चुके हैं।

26 जनवरी के बाद देशभर में खोलेंगे सरकार की पोल|

चौधरी हरपाल सिंह कहते हैं कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड निकालने के बाद किसान संगठनों के नेता देश के विभिन्न हिस्सों और गांवों में जाएंगे। किसान रैलियां करेंगे और केन्द्र सरकार की पोल खोलेंगे। सरकार किसानों को लड़ाने-भिड़ाने, छोटे-बड़े किसान की खाई पैदा करने में लगी है। हम असलियत किसानों को बताएंगे और जरूरी हुआ तो क्षेत्र में सरकार के मंत्रियों, नेताओं का प्रवेश रोकने की अपील भी करेंगे। सरकार पूरे आंदोलन को केवल हरियाणा, पंजाब का आंदोलन बताने का दुष्प्रचार कर रही है, जबकि दिल्ली की सीमा पर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल, ओड़ीसा, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश समेत तमाम राज्यों के किसान डटे हैं। कई राज्यों में किसान जहां हैं, वहीं से हमारे साथ हैं और उनके प्रतिनिधि हमारे साथ बैठकों में होते हैं। इसलिए अब यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है।  

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