इस ‘प्रदूषणमय’ शहर में हर सांस हैं ज़हर

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दिवाली के बाद से लखनऊ में हवा काफी जहरीली हो गयी है और प्रदूषण का स्तर 300 के पार पहुँच गया है पिछले 2 दिन से बढ़ते हुए पारे की वजह से लखनऊ और उसके आस पास एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 422 तक पहुंच गया हैं। इस स्तिथि में सरकार ने लखनऊ के आस पास सारे निर्माण कार्य रुकवा दिए है साथ ही साथ जगह- जगह पानी का छिड़काव किया जा रहा हैं। मंगलवार को शहर में  प्रदूषण का स्तर गहरे लाल जोन में आ गया।

देश के किन शहरों में है सबसे ख़राब हवा

जबसे ठण्ड के मौसम ने देश में दस्तक दी है तबसे कई शहरों की हवा में प्रदुषण का लेवल बहुत तेजी से बढ़ा हैं। पिछले कुछ दिनों में देश के कई शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार पहुँच गया है। जो की बहुत ही ज्यादा खतरनाक हैं। देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में यूपी के 6 शहर शामिल है। इस वक़्त सबसे ज्यादा प्रदूषित हवा फतेहाबाद की है जिसका एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 493 तक पहुँच गया हैं, इसके बाद हिसार और जींद हैं अगर हम यूपी के शहरों  की बात करें तो गाजियाबाद में एयर क्वालिटी इंडेक्स सबसे ज्यादा 453 हैं उसके बाद बुलंदशहर और अन्य हैं।

बिमारियों की हवा

प्रदूषण की वजह से लोगों में बीमारियों का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया हैं, जबसे लखनऊ और आसपास के इलाके में हवा में प्रदुषण बढ़ा हैं तबसे हॉस्पिटलों में अस्थमा और निमोनियाँ के मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ हैं। इस जहरीली हवा से मानव शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई काफी काम हो जाती हैं जिस वजह से फेफड़ा का कैंसर होने का खतरा लगातार बना रहता हैं। ये हवा लोगों की प्रतिरक्षण प्रणाली को काफी हद तक कमजोर कर देती हैं जिसकी वजह से हम बीमारियों की चपेट में ज्यादा आते हैं।

क्यों है हवा इतनी ज़हरीली

लखनऊ और आसपास के इलाकों में दिवाली के बाद से आसमान में छाए हुए स्मोग का एक सबसे बड़ा कारण दिवाली में जलाये गए पटाके और खेतों में जलाई जा रहीं पराली हैं असल में इस स्मोग का सबसे बड़ा कारण पार्टिकुलेट मैटर जो हवा में होते है और उसकी रफ़्तार को धीमी कर देते हैं। इन पार्टिकुलेट मैटर में कार्बन, नाइट्रेट और सल्फर की मात्रा काफी ज्यादा होती जो की इंसानी फेफंडों के लिए काफी खतरनाक होता है। ये फेफड़ों को बहुत ज्यादा नुक्सान पहुंचते साथ ही साथ फेफड़ों के कैंसर का चांस भी काफी हद तक बढ़ा देती हैं।

लखनऊ में 16 सालों में घटे ग्रीन जोन

पिछले 16 सालों में लखनऊ में ग्रीन जोन को सरकारी महकमों की लापरवाही की वजह से बदलकर उनपर डेवलपमेंट कर दिया गया। लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी और निर्माण विभाग ने डेवलपमेंट के नाम लगभग 30 लाख पेड़ों की बलि चढ़ा दी। जब शहर की महायोजना बनायीं गयी थी तो सरकार ने लखनऊ में ग्रीन बेल्ट्स बनायीं थी जहाँ पर घने पेड़ थे और उस जमीन पर निर्माण करने पर रोक लगायी थी लेकिन पिछले 16 सालों में सरकारी महकमों की मिलीभगत के चलते इन ग्रीन बेल्ट्स का लैंडयूज़ बदलकर इनपर धडल्ले से निर्माण करवा दिया गया। जिसकी एवज़ में उन्होंने छोटे पौधे लगाए लेकिन उन पौधों की भी देखभाल सही से नहीं की जिसका खामियाजा आज शहर को भुगतना पड़ रहा हैं।

(source:- Navbharat times)

कैसे बचे लखनऊ की हवा में फैले ज़हर से

लखनऊ की हवा पिछले कुछ दिनों में बहुत ज्यादा ख़राब हो गयी हैं। हवा में फैले प्रदुषण ने लोगों का सांस लेना मुश्किल कर दिया हैं। पिछले एक हफ्ते लखनऊ के आसमान में स्मोग बादलों की तरह से छाया हुआ हैं जिससे लोगों में सांस की बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ हैं। अब ऐसे हालात में सबसे बड़ा सवाल ये हैं की आखिर खुद को इस स्मोग से बचाया कैसे जाये, इस स्मोग से बचने के लिए लोग नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें।

 – किसी हाई ट्रैफिक एरिया में एक्सरसाइज करने से बचे।

– कहीं जाने के लिए कारपूल या बाइकपूल का सहारा लें।

– कचरा, लकड़ी और कोयला ना जलाये।

– ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए और घर में छोटे-छोटे पौधे रखें। 

– घर में एयर पयूरीफायर लगवाएं।।

– ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं।

– घर के अंदर या ऑफिस में सिगरेट ना पिए।

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