अयोध्या का रण

अयोध्या का रण
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पिछले 70 सालों से चला आ रहा अयोध्या का युद्ध और रामजन्मभूमि विवाद शनिवार को समाप्त हो गया। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 40 दिन की सुनवाई के बाद 9 नवंबर 2019 को फैसला हिन्दू पक्षकार के पक्ष में सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर निर्माण के लिए रास्ता साफ़ कर दिया हैं साथ ही साथ उसने सरकार को 3 महीने में ट्रस्ट बना कर आगे की कार्यवाई करने का आदेश दिया हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन देने को भी कहां हैं। 

शनिवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला सुनते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा की,’ 2.77 एकड़ की विवादित जमीन पर ही राम मंदिर का निर्माण होगा,’कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया की वो जल्द ही ट्रस्ट बनाये और ज़मीन को ट्रस्ट को सौंप दे, हालाँकि मंदिर की जमीन केंद्र सरकार के रिसीवर के कब्जे में रहेगी लेकिन मंदिर का निर्माण कैसे होगा और उसकी रूप रेखा कैसी रहेगी ये ट्रस्ट के ट्रस्टीज के हाथ में रहेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन मस्जिद के लिए मुहैया कराने का आदेश दिया।  सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष का ज़मीन पर मालिकाना हक़ के दावे को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में टिपण्णी करते हुए कहां की ‘ऐसे कोई सबूत नहीं मिलते हैं जिनसे ऐसा मन जा सके की 1857 से पहले मस्जिद में नमाज पढ़ी जाती हैं। साथ ही साथ कोर्ट ने कहा की हिन्दू काफी पहले से मुख्य चबूतरे पर पूजा अर्चना करते रहे हैं। अपने फैसले में कोर्ट ने ASI की उस रिपोर्ट का भी हवाला दिया जिसमें ये कहा गया हैं बाबरी मस्जिद के नीच खुदाई करते वक़्त उन्हें किसी दुसरे भवन के अवशेष मिले और हिन्दू देवी देवताओं के मूर्तियां भी बरामद हुई। सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े के मैनेजमेन्ट के दावे को खारिज कर दिया हालाँकि मंदिर के लिए बनने वाले ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को उचित प्रतिनिधित्व देने का आश्वासन दिया . 

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